यह कि जीएसटी के अंतर्गत अपीलीय ट्रिब्यूनल ट्रिब्यूनल की स्थापना हो चुकी है ।तथा करदाता और टैक्स प्रोफेशनल ट्रिब्यूनल में अपील फाइल कर रहे हैं। लेकिन कई समस्याएं उत्पन्न हो रही है जिसका कारण जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल का पोर्टल सही तरीके से कार्य नहीं कर रहा है ।
यह कि जीएसटी के अंतर्गत अपीलीय ट्रिब्यूनल ट्रिब्यूनल की स्थापना हो चुकी है ।तथा करदाता और टैक्स प्रोफेशनल ट्रिब्यूनल में अपील फाइल कर रहे हैं। लेकिन कई समस्याएं उत्पन्न हो रही है जिसका कारण जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल का पोर्टल सही तरीके से कार्य नहीं कर रहा है ।
इसके संबंध में श्री हर्ष शर्मा ,एडवोकेट ,संस्थापक अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश कर अधिवक्ता संघ (पंजीकृत) लखनऊ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल आज 2 फरवरी 2026 को जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल नेशनल बेंच के अध्यक्ष श्री संजय मिश्रा तथा अन्य सदस्यों से मिला और अधिवक्ताओं को हो रही परेशानी के संबंध में एक ज्ञापन प्रस्तुत किया। जिसमें समस्या और उनके समाधान के सुझाव शामिल थे। जिसका सारांश निम्न प्रकार है-
सेवा में,
अध्यक्ष,
जीएसटी ट्रिब्यूनल
राष्ट्रीय पीठ नई दिल्ली
महोदय,
निवेदन यह है कि जीएसटी अधिनियम 2017 1 जुलाई 2017 से प्रभावी किया गया था। इस अधिनियम के अंतर्गत अध्याय संख्या 18 में अपील और रिवीजन का उल्लेख किया गया है। जिसके अंतर्गत धारा 109 से लेकर 115 तक जीएसटी ट्रिब्यूनल का उल्लेख किया गया है। यह कि जीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन, स्थापना और प्रभावी गत वर्ष 2025 से किया गया है, लेकिन जीएसटी ट्रिब्यूनल के पोर्टल (GSTAT )पर शुरुआत में कुछ परेशानियां करदाता को और टैक्स एडवोकेट को आ रही है । जिसका हम संक्षेप में आदरपूर्वक ज्ञापन आपको प्रेषित किया जा रहा है
यह कि जीएसटी ट्रिब्यूनल (GSTAT) के गठन के बाद Appellate Side (APL-05 / APL-06) में पोर्टल आधारित कार्यवाही शुरू तो हो गई है, लेकिन व्यवहार में करदाताओं एवं अधिवक्ताओं को कई Appeal / Role / GSTAT Portal-related समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कुछ प्रमुख समस्याएँ निम्न प्रकार से प्रस्तुत की जा रही हैं—
1. यह कि GSTAT पोर्टल की भूमिका से संबंधित समस्याएँ-
(i) यह कि GSTAT पोर्टल गलत Role Assignment
कई मामलों में करदाता / अधिवक्ता को
GSTAT Appellant" या "Authorised Representative" का सही Role पोर्टल पर नहीं दिखता है जिसका परिणामस्वरूप APL-05 / APL-06 फाइल नहीं हो पाती
(ii) यह कि Vakalatnama / Authorisation का Issueपोर्टल पर अपलोड किए गए Authorisation को सिस्टम स्वीकार नहीं करता है।कभी-कभी पहले से अपलोड होने के बावजूद Role Active नहीं होता है।
(iii) यह कि Multiple GSTIN वाले मामलों में भ्रम एक व्यक्ति के कई GSTIN हों ।तो पोर्टल गलतGSTIN से जुड़ जाता है।
2. यह कि अपील (APL Forms) से संबंधित तकनीकी समस्याएँ निम्नलिखित हैं –
(i) यह कि APL-05 फाइल करते समय Error
"Order not eligible for appeal"
"Invalid Order Type"
जबकि Section 112 के अंतर्गत वह अपील योग्य है।
(ii) यह कि APL-06 (Memo of Appeal) Auto-Generate नहीं होना।कई मामलों में APL-05 फाइल होने के बाद भी APL-06 जनरेट नहीं होता है।
(iii) यह कि Upload Size / Format Error
PDF साइज सीमा बहुत कम है ।Combined documents (Annexures) अपलोड नहीं हो पाते हैं।
3. यह कि GST Portal से संबंधित समस्याएँ निम्नलिखित हैं –
(i) यह कि Order Mapping की समस्या
First Appeal Order (APL-04)ट्रिब्यूनल पोर्टल (GSTAT)में Map नहीं होता है।
"No Order Available for Appeal" दिखता है।
(ii) यह कि Date of Communication का Issue
Portal पर Communication Date खाली या गलत दिखती है। जिसके कारण Limitation की गणना प्रभावित होती है।
(iii) यह कि Fee Payment (Challan) की दिक्कत
Tribunal Fee का सही Head नहीं दिखता है।
Paid Challan पोर्टल पर Reflect नहीं होता है।
4. यह कि Procedural और Portal Combined समस्याएँ निम्नलिखित हैं –
(i) यह कि Delay Condonation का विकल्प नहीं
Tribunal में Delay Condonation की स्पष्ट Tab नहीं है।जबकि Section 112(5) में शक्ति दी गई है।
(ii) यह कि Document Index / Pagination का विकल्प नहीं है।Paper-book जैसा कोई Structured Upload नहीं है।
(iii) यह कि Hearing Notice / Cause List
Hearing Date का SMS / Mail नहीं आता है।
Cause List Portal पर अभी स्पष्ट नहीं हैं।
5. Department /Respondent की समस्या-
(i) यह कि Departmental Officer का Role Active नहीं होता है।
(ii) यह कि Reply / Cross-Objection अपलोड नहीं हो पाता है।
(iii) यह कि Both the Parties" Rule 23 के अंतर्गत confusion हैं।
6.यह कि Practical Impact (व्यावहारिक परिणाम)
Limitation विवाद बढ़ रहे हैं।Technical grounds पर अपील Reject होने का खतरा है । जो कि
Natural Justice का उल्लंघन है। जिसके कारण
High Court में Writ की संख्या बढ़ रही है।
7. यह कि जीएसटी ट्रिब्यूनल के नियमावली 2025 के अंतर्गत नियम 23 से करदाता और प्रोफेशनल सहमत नहीं है, जब वन नेशन वन टैक्स है, तो भारतीय भाषाओं को ही बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके संबंध में संलग्न प्रति।
8. यह कि उपरोक्त समस्याओं के संबंध में हमारे द्वारा निम्न समाधान हेतु सुझाव (Advocacy Points) से प्रस्तुत है-
1.यह कि GSTN द्वारा Dedicated GSTAT Portal Manualजारी किया जाना चाहिए।
2.यह कि Transitional period में Technical defects को स्वीकार मानना जाना चाहिए।
3.यह कि Tribunal द्वारा Offline / Hybrid filing की अनुमति दी जानी चाहिए।
4. Role & Authorisation हेतु स्पष्ट Circular / SOP जारी किया जाना चाहिए
1. GSTN द्वारा Dedicated GSTAT Portal Manual जारी किया जाना चाहिए।
समस्या-
यह कि GST Tribunal की अपील प्रक्रिया (APL-05 / APL-06) नई है।पोर्टल पर Role, Forms, Fees, Upload sequence स्पष्ट नहीं हैं।
Trial-and-error filing से limitation व rejection का जोखिम बढ़ गया है।
सुझाव
यह कि GSTN द्वारा एक Exclusive GSTAT User Manual जारी किया जाए जिसमें—
Step-by-step APL-05 → APL-06 → Fee → Hearing Flow Role creation (Appellant / AR / Department)Error codes & solutions
Sample screenshots (Illustrative) शामिल होना चाहिए।
विधिक आधार (Legal Base)
Principle of Fair Procedure/Article 14 & 19(1)(g) – Ease of Doing Business
Technical system -legal barrier.
2. यह कि Transitional Period में Technical Defects को Curable माना जाए चाहिए
समस्या-
यह कि Portal defects के कारण अपील reject हो रही है।
यह कि Technical mistake – substantive default हैं।
सुझाव
यह कि प्रारंभिक 1–2 वर्षों के लिए Tribunal द्वारा यह घोषित किया जाए कि—
"All technical / procedural defects in filing shall be treated as curable" होगा।
यह कि Rectification का अवसर दिया जाना चाहिए।
यह कि Limitation का लाभ न छीना जाए।
न्यायिक समर्थन
SC: State of Punjab v. Shyamalal Murari (1976)
Procedural law is handmaid of justice
यह कि GST के संदर्भ में Courts ने बार-बार कहा है कि Portal cannot defeat substantive rights
3. Tribunal द्वारा Offline / Hybrid Filing की अनुमति दी जानी चाहिए –
समस्या
यह कि Portal downtime / error आना।
यह कि Order mapping failure/Fee payment mismatch होना।
सुझाव
यह कि Tribunal Rules में यह व्यवस्था की जाए—
Offline filing + later online regularisation
या Hybrid mode (Physical + GSTAT Portal)
यह कि Filing Date Date of physical submission
संवैधानिक आधार
Access to Justice
भारत के संविधान के Article 21 के अंतर्गत
Natural Justice एक आवश्यक प्रक्रिया है।
यह कि High Court Trend GST Portal failure मामलों में Courts ने manual filing स्वीकार की है।
4. Role & Authorisation हेतु स्पष्ट Circular / SOP जारी किया जाना चाहिए –
समस्या
एडवोकेट रिकॉर्ड role activate नहीं होता है।
Vakalatnama अपलोड के बावजूद access denied Multiple GSTIN confusion हैं।
सुझाव
यह कि CBIC / GSTN द्वारा Standard SOP जारी हो जिसमें—
कौन-कौन सा document sufficient है
एडवोकेट रिकॉर्ड की scope (file / argue / upload) हो।
Department side roles भी defined हों।
Role rejection / revocation का remedy
Practical Benefit होना चाहिए जिससे Litigation कम होगी। और Tribunal समय बचेगा।
Department & Taxpayer दोनों को clarity मिलेगी।
उपरोक्त समस्याओं के लिए प्रस्तुत ज्ञापन और निराकरण सुझाव के आधार पर हम जीएसटी ट्रिब्यूनल के संबंध में निम्नलिखित प्रार्थना करते हैं कि –
In the absence of a dedicated GSTAT portal manual, clear SOP on roles, and transitional protection against technical defects, the right of appeal under Section 112 CGST Act risks being rendered illusory. The Tribunal and GSTN must adopt a facilitative and justice-oriented approach, allowing curable defects, hybrid filing, and clear procedural guidance.
प्रार्थना
महोदय,
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आपसे विनम्र प्रार्थना है कि वर्तमान स्थिति में जीएसटी ट्रिब्यूनल में उत्पन्न पोर्टल और व्यवहारिक समस्याओं के संबंध में विधिक प्राधिकरण और पोर्टल निर्माता से आवश्यक कार्रवाई करने हेतु निर्देश/आदेश जारी करने की कृपा करें।
आदर सहित ज्ञापन प्रेषित।
दिनांक 2 फरवरी 2026 निवेदक
हर्ष शर्मा
एडवोकेट
संस्थापक अध्यक्ष,उत्तर प्रदेश कर अधिवक्ता संघ( रजिस्टर्ड) लखनऊ
स्थान हापुड़
उपरोक्त के अतिरिक्त विभिन्न समस्याओं के संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता संजय शर्मा ने निम्नलिखित बिंदुओं को प्रस्तुत किया –
1. 10% प्री डिपाजिट का विषय।
2. नियम 23 के अंतर्गत ट्रांसलेशन का विषय
3. नियम 10 और 13 के संबंध में चर्चा।
4. जीएसटी ट्रिब्यूनल की नई सर्किट और कैंप बेंच के विषय में चर्चा हुई।
उपरोक्त ज्ञापन और मांग पत्र के संबंध में माननीय अध्यक्ष ,जीएसटी ट्रिब्यूनल नेशनल बेंच नई दिल्ली द्वारा उदारतापूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया तथा कुछ विषय पर अपने अधीनस्थ को निर्देशित भी किया है,जो अधिवक्ता हित में जारी होने आवश्यक है।
यह कि प्रतिनिधि मंडल में मेरठ के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय शर्मा, मोहम्मद सलीम एडवोकेट तथा नोएडा के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कालरा शामिल थे।
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